मेरा नाम सिद्धार्थ मित्रा है. फिलहाल उम्र 22 साल है. इस परिचय के लिखते समय वर्तमान स्थिति ये है कि कॉलेज समाप्त हो गयी है और एक बहुराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी में अपना करियर प्रारंभ करने वाला हूँ और अभी घर में प्रतीक्षा कर रहा हूँ.
खैर, ये तो रही तथ्यात्मक सूचना अपने बारे में. बात किया जाए ब्लॉगिंग के विषय में और इस ब्लॉग के शीर्षक के ऊपर भी. सर्वप्रथम, मैं ये बताना चाहूँगा कि मैंने ब्लॉग लिखना लगभग डेढ़ वर्ष पहले प्रारम्भ किया. मेरा पहला ब्लॉग अंग्रेजी में है और उसका शीर्षक है Reveille( 4 प्रविष्टियां लिखी जा चुकी हैं उसमे अभी तक). ऐसे मेरी मातृभाषा बंगला है पर मूलतः बचपन से रांची में पला-बड़ा हुआ हूँ. पूरा स्कूली जीवन यहीं व्यतीत हुआ है. शायद हिंदी से एक अजीब सा लगाव आ गया इसी कारणवश. ऐसे बांग्ला में बस थोड़े उच्चारण की कमी है, नहीं तो बाकी सब ठीक हैं ( लिखने में थोड़ी कठिनाई होती है अभी भी ;) ) स्कूल में कक्षा 8 तक ही हिंदी पढ़ा; कारण था कि हम सबको हिंदी और संस्कृत में चयन करना होता 9th कक्षा में और उन दिनों में नंबर के लिए भीषण संघर्ष होता था. इसलिए संस्कृत की जीत हुई क्योंकि हिंदी में नंबर काफी पसीना बहाने के बाद ही नसीब होते थे. ऐसे उसके बाद भी हिंदी के साथ मेरा रिश्ता अखबारों और कॉमिक्स, पत्रिकाओं आदि के माध्यम से संलग्न रहा. कॉलेज ज्वाइन करने के पश्चात हमारे रिश्ते में थोड़ी सी दरार आ गयी जिसको मैं अभी फिर से मज़बूत बनाने का प्रयास कर रहा हूँ. ऐसे भी हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, जो कि कुछ लोगों के अनुसार महज़ एक "आधिकारिक भाषा" है. ये ब्लॉग एक तरह से मेरी ओर से एक क़सीदा (ode or tribute) है हिंदी के लिए और इससे हमारे अपने जीवन एवं समाज की कुछ पहलुओं पर प्रकाश डालने का मेरा यहाँ प्रयास रहेगा.
मंथन में ऐसे विषयों पर उल्लेख किया जाएगा जो व्यक्तिगत भी होंगे और सामाजिक भी; या फिर जो इन दोनों पहलुओं को बांधती हैं.
अंततः मैं ये कहना चाहूँगा कि ये मेरा प्रथम प्रयास है हिंदी में ब्लॉग लिखने का. ऐसे तो मैं कोई लेखक नहीं हूँ. अंग्रेजी में भी मैंने अभी काफी कम ही लिखा है. हाँ, ये बात है कि मैं एक पाठक और चिन्तक ज्यादा हूँ. मैं सोचता कभी-कभार थोड़ा ज्यादा हूँ और यहीं समस्या उत्पन्न हो जाती है. अतः ऐसा हो सकता है कि मेरे विचार कहीं कुछ असंगठित लगें. ऊपर से मेरी हिंदी अब काफी निपुण तो नहीं है, पर फिर भी मैं कोशिश करूंगा कि गलतियाँ कम-से-कम हों. आशा है कि व्याकरण में छोटी मोटी त्रुटियों को आप नज़रंदाज़ कर सकेंगे. रचनात्मक आलोचना सर्वदा स्वागत-योग्य हैं. धन्यवाद ! :)
P.S: मेरी कोशिश रहेगी कि भविष्य में बंगला भाषा में भी एक ब्लॉग लिख पाऊं; पर अभी मुझे उस मुकाम तक पहुँचने में काफी लम्बा सफ़र तय करना पड़ेगा. सो अभी हिंदी में ही आप मेरे ब्लॉग पढ़िए. :)
dekh bhai.. ham hindi grammar ke bare me to kuch bol nai sakte.. have always been weak in hindi, n even i took sanskrit.. not because of number, because i was scared of hindi.. :P :P
ReplyDeletenone the less continue with Reveille.. looking forward for more posts...